मुख्यमंत्री- राष्ट्रपति तक को भेजे ज्ञापन, पर ‘पानी’ हुआ ना कम

कस्बे की ईटली वाली ढ़ाणी में एक साल से बनी हुई है समस्या

समाधान ना होने से परेशान लोग मुख्यमंत्री व राष्ट्रपति तक लगा चुके गुहार

न्यूज़ चक्र कोटपूतली। (रिपोर्ट-धर्मवीर कुमावत)।  कोटपूतली शहर के वार्ड नम्बर 4 की ढ़ाणी ईटली वाली में सड़क पर भरे पानी निकासी को लेकर लोग अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। यहां सड़क किनारे जोहड़ में हो रहे पानी के ओवर फ्लो से लोगों का जीना दुभर हो गया है। बच्चे घर से स्कूल के लिए निकलते हैं तो पानी में गिर कर ड्रेस खराब कर लाते है। स्थानीय निवासी शहर से कुछ कमा कर रात को जब घर लौटते हैं तो पानी में गिर कर खून पसीने की कमाई गवां देते हैं। आपको बता दें कि यह सिलसिला एक दो महीने से नहीं बल्कि सालभर से यूं ही चल रहा है।  समस्या से परेशान लोग समाधान के लिए कई बार नगर पालिका और उपखंड अधिकारी कार्यालय में लिखित में दे चुके हैं। यहां तक कि जब कोई सुनवाई ना होते दिखी तो राज्य के मुख्यमंत्री और देश के राष्ट्रपति को भी ज्ञापन भेज चुके हैं। लेकिन बावजूद इसके पानी और स्थानीय प्रशासन अपनी जगह से हिलने को तैयार नहीं है।

उल्लेखनीय है कि जयपुर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग को गोपालपुरा रोड़ स्थित हाऊसिंग बोर्ड से जोडऩे वाला यह रास्ता गंदे पानी के जोहड़ के ओवरफ्लो हो जाने के कारण पुर्णतया: जल मग्न है। जिससे ना केवल स्थानीय नागरिकों का जीना मुश्किल है बल्कि यहां से निकलने वालों को भी भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उक्त मार्ग पर आधा दर्जन से ज्यादा स्कूल भी हैं। जिनके हजारों विद्यार्थियों में भी बीमारियाँ फैलने का अंदेशा रहता है। कई बार इस रास्ते से गुजरने वाले स्कूली विद्यार्थियों एवं बुजुर्गों सहित दुपहिया वाहन चालक गिरकर घायल हो जाते हैं।

9 दिसंबर 2019 को भेजा था राष्ट्रपति को ज्ञापन

 

अखबारके ब्यूरो चीफ धर्मवीर कुमावत ने बताया कि सब्जी मंडी में किसान अपनी सब्जी को मंडी तक पहुंचाने के लिए इसी रास्ते से परेशान होकर गुजरता है। ढाणी फौजावाली, अमरपुरा नई कोठी, उपली कोठी, रामसिंहपुरा, इटली की ढाणी, हाउसिंग बोर्ड सहित दर्जनों गांव के निवासी इसी गंदगी भरे रास्ते से होकर गुजरते हैं लेकिन जिम्मेदार इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकाल पा रहे हैं। वर्तमान समय में बिना बारिश के ही रास्ता नालियों के गंदे पानी से जलमग्न हो रहा है तो बारिश के समय पर स्थिति कितनी भयावह होगी इसका अंदाजा इस गंदे पानी से जलमग्न रास्ते को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है।

अब देखना यह है कि प्रशासन अपनी कुंभकरणी नींद से पहले जागता है या कोई हादसा होने का इंतजार करता है।

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