आवाम के ‘बोल’, शहादत का समझो ‘मोल’

न्यूज चक्र@ विकास वर्मा कोटपूतली। कोटपूतली के राजकीय एलबीएस कॉलेज में शौर्यवीर शहीद मेजर सतीश दहिया की मूर्ति लगवाए जाने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। 21 अगस्त 2017 को कॉलेज के वर्तमान छात्रों एवं पुरातन छात्र परिषद ने वर्तमान छात्र पदाधिकारियों की अगुवाई में प्रथम बार यह मांग कॉलेज प्रशासन के समक्ष रखी थी। लेकिन तब से अब तक इस संबंध में कोई कार्रवाही होती दिखाई नहीं दी है। कॉलेज प्रशासन के उदासीन रैवये के चलते अब बात ‘शहादत के अपमान’ की होने लगी है। युवा रेवाल्युशन के संस्थापक अध्यक्ष मनोज चौधरी द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक पर ‘शहीद मेजर दहिया के सम्मान में चलाए गए एक अभियान में ना केवल छात्रों बल्कि आमजन ने भी भारी संख्या में अपनी भावनाऐं व्यक्त की हैं और शहीद मेजर दहिया की मूर्ती एलबीएस कॉलेज में लगाए जाने की मांग की है। दिनांक 14 फरवरी, 2017 को जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में आतंकवादियों से मुकाबले में शौर्यवीर मेजर सतीश दहिया शहीद हो गए थे। वे समीपवर्ती हरियाणा के नांगल चौधरी के निवासी थे तथा यहां राजकीय एलबीएस कॉलेज के छात्र रहे हैं। हम आमजन के वे विचार आप तक पहुंचा रहे हैं जो युवा रेवाल्युशन के संस्थापक अध्यक्ष मनोज चौधरी की फेसबुक वॉल पर शहीद मेजर दहिया के सम्मान में व्यक्त किए हैं। इन विचारों में कॉलेज प्रशासन के प्रति आक्रोश है साथ ही सैकड़ों की संख्या में लोगों ने जय हिन्द लिखकर कोटपूतली की एलबीएस कॉलेज में मूर्ति लगवाए जाने की मांग का समर्थन भी किया है। पढ़िए किसने क्या लिखा...

हीरा कसाना ने लिखा कि हम सभी शहीदों और भारतीय सेना का उतना ही सम्मान करते हैं, जितना हमारे परम मित्र और बड़े भाई मेजर साहब सतीश दहिया का ! शहादत का सम्मान होना चाहिए ! क्योंकि यह युवा शक्ति और देशवासियों के लिए प्रेरणा का काम करती है।

अशोक गूर्जर लिखते हैं कि मूर्ति या स्मारक बनाने का मुख्य उद्देश्य होता है कि लोग उक्त विभूति या व्यक्तित्व से प्रेरणा ले सकें और उनके विचारों को अपने जीवन में उतार सके। मेजर साहब की मूर्ति को कोटपूतली कॉलेज परिसर में लगना चाहिए। हम इसका पुरजोर समर्थन करते हैं। ताकी महाविद्यालय में आने वाला प्रत्येक छात्र उनके व्यक्तित्व को जान सके और उनके विचारों को अपने जीवन में उतार सके। क्योंकि आज के इस दौर में जहां विश्व के सभी देश अपने सैनिक क्षमता बढ़ाने में लगे हुए हैं, तो हमारे देश के लिए भी यह जरुरी है ! इसके लिए युवाओं को देश सेवा मे जाना चाहिए और सेना इसका सबसे अच्छा माध्यम है।
जो लोग इस अभियान को राजनीति समझते हैं उन्हें स्वयं का आकलन करना चाहिए और मेजर साहब के बारे में थोड़ी सी जानकारी लेनी चाहिए। हमें आशा है कि आप सभी लोग इस मुहिम में हमारा हमारा साथ देंगे क्योंकि शहीदों की कोई जाति या धर्म नहीं होता है वे केवल देश के और अपनी मातृभूमि के सुपुत्र होते हैं !
जय हिंद !
मेजर सतीश दहिया अमर रहे !

मामचंद यादव ने लिखा कि कुछ लोग का तो काम ही मटर को डाइवर्ट करने का होता है, शर्म करनी चाहिए कि एक महान शहादत का तो मजाक नही बनाना चाहिए।

मुकेश कुमार कसाना लिखते हैं कि पता नहीं क्या सोच है प्रशासन की प्रत्येक व्यक्ति राजनीति से ग्रसित है, वाह रे राजनीति क्या तेरा खेल है।



प्रदीप सामोता
ने लिखा कि एक समय था जब गुरूजन हमें पढ़ाते थे कि भारतवर्ष की आज़ादी के लिए कई लोगों ने एक साथ होकर लड़ाई लड़ी तथा इनके नाम व जीवन काल के बारे मे भी पढ़ाते थे जैसे कहॉ से थे, माँ बाप कौन थे, देश के लिए क्या करना चाहते थे आदि। लेकिन कोटपुतली कॉलेज मे शहीद मेजर सतीश की प्रतिमा को लेकर जो राजनीति की जा रही है उसे देख कर लगता है कि गुरूजनों की विचारधारा व चाल चरित्र ही बदल गया है।

सत्यनारायण सोनी ने लिखा कि कोटपूतली में हमेशा से ही गन्दी राजनीति होती आ रही है लेकिन इस बार जो की एक शहीद को लेकर की जा रही है लेकिन शहीदों का अपमान अब सहन नहीं कीया जायेगा भाई अगर सभी एक होकर कन्धे से कंधा मिलाकर चले तो वह दिन दूर नहीं जब वही लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय के प्रांगण में शहीद मेजर सतीश दहीया की भव्य प्रतिमा ना लगे।

आगरा से संदीप त्यागी ने लिखा कि मेरा नाम संदीप त्यागी है और मै आगरा उत्तरप्रदेश का रहने वाला हूं ,मै मेजर सतीश दहिया से कभी नहीं मिला, न मै कोटपुतली में उनके कॉलेज और दोस्तों को जानता हूं। मगर मैंने मेजर सतीश की बहदुरी के किस्से टीवी पर देखे है। उनकी शाहदत को नमन करता हूं। अगर वो किसी कॉलेज से पढ़कर आर्मी अफसर बने है और देश के लिए अपना बलिदान दिया है तो उस कॉलेज में उनकी मूर्ति तो खुद कॉलेज वालो को ही लगनी चाहिए उन्हें खुद ही इसकी पहल करनी चाहिए और अगर वो इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे है तो इससे ज्यादा शर्म की बात और क्या हो सकती है।

…तो आपने पढ़ा कि किस तरह से आमजन एक शहीद को उसका सम्मान दिलाने के लिए एकजुट है। अब देखना यह है कि कोटपूतली कॉलेज प्रशासन अपने छात्र एवं आमजन की भावनाओं की कितनी कद्र करता है।

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3 thoughts on “आवाम के ‘बोल’, शहादत का समझो ‘मोल’”

  1. प्रेरणा स्त्रोतों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। युवा पीढ़ी में सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इस कार्य को जल्द पूरा होने में सहयोग दें।

  2. बहुत बहुत आभार आपका , आपने कोटपुतली की आवाज़ को संबल प्रदान किया है | एक जायज़ मांग को आपने लिखा इसके लिए हम न्यूज़ चक्र के आभारी रहेंगे | कोटपुतली का युवा आपको सलाम करता है ,, न्यूज़ चक्र ने अपनी असली भूमिका अदा की है …..

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