‘समाज पर भारी, आस्था के बलात्कारी’

न्यूज चक्र@ विकास वर्मा।


बीते कुछ दिनों की घटनाऐं, समाचार और टीवी चैनलों की सुर्खियां समाज में धर्म और आस्था के बीच पनपे घोर अंधविश्वास की ओर इशारा कर रही हैं। समाज शार्टकट की चाह में धर्मगुरू, बाबा और मौलवियों की बेड़ियों में जकड़ने लगा है। भगवान और अल्लाह से बढ़कर बाबा और मौलवियों में आस्था का यह अंधापन सही-गलत का फर्क भी देखने नहीं दे रहा है। नौकरी, शादी, प्रेम, बीमारी या व्यापार। कुछ भी हो लोग अपनी बहन-बेटियों को लेकर मौलवियों व बाबाओं के मठ में पहुंच जाते हैं, और चुटकियों में फूंक मारकर अपना इच्छित काम करवाने की इच्छा रखते हैं।



बकौल पीके आज हर कॉल रान्ग नम्बर पर जा रही है। धर्मगुरू अपने अनुयायियों का नैतिक व सामाजिक निर्माण करने की बजाय उनकी आस्था और विश्वास का लोकतांत्रिक ताकत के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। बोलचाल की भाषा में संत कहलवाने वाले ये धर्मगुरू महंगी लग्जरी गाड़ियों में चलते हैं, सैकड़ों एकड़ जमीन में अपना आलीशान अय्याशगाह बनवाते हैं, सुदंर बच्चियों एवं महिलाओं को अपने मोहमाया जाल में फंसाकर ‘साध्वी’ बनाते हैं।…और फिर जब कभी इस अय्याशी का विरोध होता है तो अपनी राजनैतिक एवं लोकतांत्रिक ताकत का इस्तेमाल कर बवाल मचाते हैं। हाल ही हरियाणा में यही तो हुआ। आस्था और राजनीतिक गठजोड़ के बीच हिंसा और आगजनी के साथ समाज के नैतिक मूल्यों का धुंआ किस तरह उठा यह पूरे देश ने देखा।
हमारे देश में गुरमीत राम रहीम की तरह कई उदाहरण सामने आए हैं जिनका समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा है। बाबा परमानन्द, संत रामपाल, आसाराम बापू, स्वामी नित्यानंद, संत भीमानंद सहित ऐसे अनेकों हैं जिन्होंने ‘आस्था का बलात्कार’ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। मुस्लिम समाज में आस्था के नाम पर ‘हलाला’ में तो ना जाने कितनों के नाम गिनाए जा सकते हैं।
सवाल यह है कि हवस के पुजारियों के हाथों आस्था का बलात्कार ये देश कब तक सहेगा।…और अगर इसी तरह धर्मगुरू आस्था के नाम पर नंगा नाच नाचते रहे तो फिर धर्म, आस्था और विश्वास की रक्षा कैसे होगी ?


तो लोगों को अपने लालच और सफलता के शार्टकट से बचना होगा। यही एक सरल उपाय है। याद रखिए हमारा कर्म ही हमें सफल या असफल बनाता है। इसके लिए किसी बाबा या मौलवी का कोई चमत्कार काम नहीं करेगा। न्यूज चक्र आपसे निवेदन करता है कि आपका धर्म, आपकी आस्था श्रेष्ठ है इसे अपनी परमात्मा से मिलाने में लगाइए। किसी पांखड के धंधे का हिस्सा मत बनिए और ऐसे बाबाओं एवं मौलवियों से देश व समाज को बचाइए।

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