धूल के गुब्बार के बीच मंडराती है “मौत”, आज फिर एक ‘जान’ गई

न्यूज चक्र, कोटपूतली। आज फिर कोटपूतली -नीमकाथाना मार्ग पर स्कूल बस से उतर कर घर आ रही एक 6 वर्षिय बालिका को ओवरलोडेड डम्फर ने कूचल दिया। जिससे बालिका की मौके पर ही मृत्यु हो गई। घटना से गुस्सायें ग्रामीणों ने मौके पर जाम लगा दिया। जो मंगलवार शाम खुलते-खुलते किलोमीटरों लम्बा हो गया। … लगभग हर दिन इंसानों का खून मांगती इस सड़क पर लगता है प्रशासन ने अपने घुटने टेक दिए हैं। 
प्रशासन की अनदेखी के चलते उपखण्ड क्षेत्र में खनन सामग्री से ओवरलोड वाहनों से सडक़ें गड्ढों में तब्दील हो गई है। ऐसे में वाहन इन जर्जर सडक़ों पर हिचकोले खाते हुए चल रहे हैं। कई जगह तो ये गड्ढे तीन से चार फीट तक हो गए हैं। ऐसे में इस मार्ग से गुजरने वालों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

बरसात के मौसम के बाद मुख्य सडक़ मार्गों सहित गांव की सडक़ें भी बदहाल हो गई है। रोक के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे अवैध खनन ने शहरवासियों का सड़कों से निकलना मुश्किल कर दिया है। आवेरलोड ट्रेलर, ट्रकों, ट्रैक्टरों से सडक़ें गड्ढों में बदल गई है। क्षेत्र में रात 8 बजे से देर रात तक धड़ल्ले से खनन सामग्री से भरे ओवरलोड़ वाहन गुजरते रहते हैं।

नारेहडा की राह में अब सिर्फ रोडे

कोटपूतली- नीम का थाना रोड पर स्थित नारेहडा गांव अवैध खनन का सबसे ज्यादा शिकार है. ओवरलोड वाहनों के चलते नारेहडा बस स्टैंड पर दो से 3 फुट तक के गहरे गड्ढे हो चले हैं, जहां से दुपहिया  वाहन चालकों व पैदल राहगीरों का निकलना दुश्वार हो चला है. गहरे गड्ढों के चलते ओवरलोड वाहन अक्सर यहां खराब हो जाते हैं जिससे यहां जाम की स्थिति बनी रहती है. समस्या के निराकरण के लिए नारेहडा ग्राम वासियों ने कई बार यहां धरना – प्रदर्शन भी किए हैं और प्रशासन को कई बार ज्ञापन देकर अवगत करवाया है, लेकिन हालात जस के तस हैं.

कोटपूतली मुख्य चौराहे पर ‘मंडराती है मौत’

कोटपूतली मुख्य चौराहे पर समुचित जगह ना होने के बावजूद यहां से ओवरलोड ट्रोले फंसते – फसाते दिल्ली की ओर सर्विस लाइन पर घुमाव खाते हैं. इस दौरान मुख्य चौराहे पर खड़े वाहनों व राहगीरों के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने का भय हर समय बना रहता है.  हालांकि मुख्य चौराहे पर यातायात चौकी है लेकिन बेधड़क गुजरते ट्रोले व डम्परों को रोकने की हिम्मत यहां कोई नहीं जुटा पाता है. कोटपूतली पुलिस की पीसीआर यहां आती जरूर है लेकिन पुलिया नीचे खड़ी सब्जी की रेहडियो को भगाकर निकल जाती है.

 

चोलाई चौक पर होते हैं इकट्ठे

खनन सामग्री से भरे ओवरलोड ट्रक, डंपर और ट्रैक्टर रात को 8:00 बजने के इंतजार में कोटपूतली पहुंचने से पूर्व चोलाई चौक पर इकट्ठे होते रहते हैं. हालांकि एक-एक कर दिन भर कोटपूतली शहर से भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है.  लेकिन रात होते ही चोलाई चौक पर इकट्ठे हुए सभी तरह के भारी वाहन एक साथ कतारबद्ध होकर चौलाई चौक से रवाना होते हैं. जिसके चलते कोटपूतली- नीमकाथाना मार्ग पूरी तरह से जाम में तब्दील हो जाता है. इस दौरान दुपहिया व छोटे चौपाया वाहनों का निकलना भी मुश्किल हो जाता है. जाम के चलते कोटपूतली से नारेहडा तक का महज 7 किलोमीटर का सफर तय करने में वाहन चालकों को घंटों लग जाते हैं.

 

नोट-  हम इस समाचार में किसी भी अधिकारी या समाजसेवी के ‘ व्यू / विचार ‘ नहीं ले रहे हैं, क्योंकि बरसों से अधिकारियों के एक ही तरह के व्यू आते हैं कि कार्यवाही कर रहे हैं.  लेकिन कार्यवाही होती दिखाई नहीं देती. वैसे जानकारी के लिए बता दें कि खनन क्षेत्र में जहां से खनन सामग्री लेकर ओवरलोड वाहन निकलते हैं उसके बाद सरूण्ड गांव में टोल बूथ है.  टोल बूथ के बाद सरूण्ड पुलिस थाना है…. और सरूण्ड पुलिस थाने के बाद चोलाई चौक पर थाने की पीसीआर भी खड़ी रहती है, लेकिन पीसीआर के जवान मूकदर्शक बनकर ही ओवरलोड वाहनों को वहां से गुजरते हुए देखते हैं… इससे स्थिति को समझा जा सकता है. खनन व परिवहन विभाग की बात करना तो यहां पर बेमानी होगी.

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