कोरोना पाॅजिटिव मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार, जिम्मेदारों की आंखे बंद ?

एक तरफ जहां समूचा सरकारी तंत्र कोरोना से बचाव के लिए बार बार हाथ धोने, सैनिटाइजर का उपयोग करने और सामाजिक दूरी बनाए रखने की हिदायत देता है। वहीं कोटपूतली के राजकीय बीडीएम अस्पताल में कोरोना मरीजों के साथ अमानवीय बर्ताव हो रहा है। …अब इन्हें ये कौन समझाए कि कोरोना महामारी तो किसी को भी हो सकती हैं। यह ना धर्म देखती है, ना जाती, ना पद।

न्यूज चक्र, कोटपूतली। विकास वर्मा/ सीताराम गुप्ता। कोरोना महामारी से पूरा देश जूझ रहा है। यह भी पता नहीं है कि कौन, कब, कहां और कैसे कोरोना की जद़ में आ जाए। ऐसे में हमने और आपने यहां तक कि पूरे देश ने डॉक्टर्स को, चिकित्सकीय स्टाफ को कोरोना योद्धा कहा है, कोरोना वीर कह कर सम्मानित किया है। फूल भी बरसाए हैं। लेकिन जयपुर जिले की कोटपूतली तहसील के राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जिन्हें देखकर रूह कांप जाए। खुद कोरोना मरीजों ने बताई अपनी पीड़ा। जी हां, कोटपूतली के राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल में कोरोना मरीजों के साथ कैदियों और पशुओं से भी बदतर बर्ताव किया जा रहा है। रोटी सब्जी वार्ड के बाहर पटक दी जाती हैं। वार्ड में सफाई की बात तो दूर मरीज के बेड की चद्दर तक नहीं बदली जाती है, खराब होने पर मरीज ही उसे तीन-चार दिन में उठाकर एक तरफ पटक देता है। पीने के पानी के लिए कोरोना के 8- 10 मरीजों पर केवल एक कैंपर रखा हुआ है। शौचालय भी साझा है, जिसके समीप जाने भर से उल्टियां शुरू हो जाएं।…और इन सब का उल्लेख किया है कोटपूतली विधानसभा के पूर्व विधायक रहे सुभाष शर्मा ने अपनी फेसबुक वाॅल पर। पूर्व विधायक सुभाष चंद शर्मा ने अपनी फेसबुक वाॅल पर लिखा है कि एक कोरोना पाॅजिटिव मरीज ने उन्हें फोन कर पूरी पीड़ा बताई है। इसके बाद हमने भी कोरोना पाॅजिटिव से जब वास्तविक हालात जानें तो सन्न रह गए। (चूंकि पीड़ितों ने नाम ना छापने की शर्त पर अपनी व्यथा बंया की है इसलिए हम नाम उजागर नहीं कर रहे हैं।)

पूर्व विधायक सुभाष चंद शर्मा वाॅल से (साभार)

एक तरफ जहां समूचा सरकारी तंत्र कोरोना से बचाव के लिए बार बार हाथ धोने, सैनिटाइजर का उपयोग करने और इस सामाजिक दूरी बनाए रखने की हिदायत देता है। वहीं कोटपूतली के राजकीय बीडीएम अस्पताल में कोरोना मरीजों के साथ अमानवीय बर्ताव हो रहा है। अब इन्हें ये कौन समझाए कि कोरोना महामारी तो किसी को भी हो सकती हैं। यह ना धर्म देखती है, ना जाती, ना पद।

संवेदनहीनता, लापरवाही…?
पूर्व विधायक शर्मा ने यह भी उल्लेख किया है कि कोरोना पाॅजिटिव का शव कोरोना वार्ड में करीब 3 घंटे तक खुले में उसके बैड पर पड़ा रहा, लेकिन किसी ने उसकी सुध तक नहीं ली। जबकि इस दौरान अन्य कोरोना पाॅजिटिव मरीज भी वार्ड में ही मौजूद रहे। अस्पताल प्रशासन की यह लापरवाही वार्ड में मौजूद कोरोना पाॅजिटिव मरीजों की जान पर भारी पड़ सकती थी ?

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने चेताया
वहीं राज्य के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने प्रदेश के सभी राजकीय चिकित्सा संस्थानों के प्रभारी चिकित्सकों को कोरोना रोगियों के उपचार के प्रति गंभीरता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अधिकांश चिकित्सा कर्मी समर्पित भाव से कोरोना उपचार में लगे हुए हैं। उपचार में लापरवाही की शिकायतों की जांच करवाकर लापरवाही बरतने वाले के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डॉ. शर्मा ने कहा कि पूरा समाज चिकित्साकर्मियों, नर्सिंग कर्मी, पैरामेडिकल स्टाफ की तारीफ कर रहा है और उन्हें कोरोना वॉरियर्स कहकर संबोधित कर रहा है। ऐसे में कुछ लोगों की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के किसी भी राजकीय या निजी चिकित्सालयों में कोरोना के सही उपचार की कमी महसूस होने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण कक्ष के 0141-2225624 दूरभाष नंबर पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

क्या कहते हैं अस्पताल के पीएमओ के.एल. मीणा
न्यूज चक्र ने जब इस मामले में अस्पताल के पीएमओ के. एल. मीणा से बात की तो उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि – ‘अस्पताल मरीजों के इलाज के लिए है, उन्हें खाना देने की हमारी जिम्मेदारी नहीं हैं। इसके लिए सरकार को लिखो। हमारे पास जितना बजट होगा, उतना ही देगें।’


सोशल मीडिया पर बार-बार विडियो, आडियो व समाचार वायरल लेकिन कार्रवाही ?
कोटपूतली के राजकीय बीडीएम जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं व कोरोना पाॅजिटिव मरीजों को हो रही असुविधाओं को लेकर 17 जून से अब तक कई बार सोशल मीडिया पर कई बार समाचार, विडियो और आॅडियो वायरल हो चुकी हैं बावजूद इसके कोटपूतली प्रशासन आंख-कान बंद किए बैठा है। कोटपूतली प्रशासन को वह सब दिखाई नहीं दे रहा है जो कोटपूतली मीडिया दिखाना चाहती है। एक दिन पहले ही एक चैनल (Kot News) ने भी कोटपूतली के जिला अस्पताल की अव्यवस्थाओं को उजागर किया है, लेकिन कार्रवाही ?

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नोट- न्यूज चक्र डाॅक्टर्स का सम्मान करता है, लेकिन अस्पताल में मरीजों के साथ हो रहे अमानवीय बरताव पर ‘जिम्मेदारों पर कार्रवाही’ होनी चाहिए। अगर आप हमसे सहमत हैं तो समाचार को शेयर करना ना भूलें।

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